हैलो दोस्तो कैसे हैं आप सब।Hindi Post में आपका स्वागत हैं।आज हम आप लोगों से नजरिया के ऊपर बात करूंगा।आशा करता हूं।आपको यह पोस्ट जरूर पसंद आयेगी।तो चलिये शुरू करते हैं।तो दोस्तो नजरिया होता क्या हैं।नजरिया इंसान के देखने और समझने का एक गुण है।इंसान जिस चीज को देख रहा है।और उसके बारे में क्या सोच रहा हैं।इसे इंसान का नजरिया कहते है।नजरिया दो प्रकार का होता हैं।
(i) सकारात्मक नजरिया
(ii) नकारात्मक नजरिया ,
आइये इन दोनो को हम एक कहानी के जरिये समझते है।एक दिन एक आदमी अपने 10 साल के बेटे को बाजार में घुमाने ले गया।दोनों बाजार में घूम ही रहें थे।कि बेटे ने एक दुकान पर सेब रखेदेखे तो उसने वो सेब लेने के लिए अपने पिता से जिंद की।तो उस आदमी ने अपने बेटे को तीन.सेब दिला दिये।और घर की ओर चलने लगें।रास्ते में उस आदमी ने अपने बेटे से एक सेब मांगा एक सेब वो लड़का पहलेसे खा रहा थापिता के मांगने पर उसने उन दोनों सेबों मे भी मूँह मार दिया।अब मैं आपसे यह पूछना चाहूँगा।कि इस समय उस आदमी का नजरिया कैसा होगा।या बो अपने बेटे के बारे में क्या सोच रहा होगा।यही कि यह अभी इतनी छोटी उम्रमें ऐसा कर रहा हैं।तो बड़ा होकर पता नही हमारे साथ क्या करेगा।यानि उस आदमी का अपने बेटे के प्रति नजरिया नकारात्मक होगा न।लेकिन अगले ही पल बेटा अपने पापा से बोलता है।कि पापा ये वाला सेब आखाओ यें मीठा हैं।अब उस इंसान का नजरिया कैसा होगा।बेटा अपने पिता को मीठा सेब खिलाना चाहता था।तो दोस्तों शायद आपको समझ आ गया होगा।और हम आगे और भी पोस्ट नजरिया के ऊपर डालने वाले हैं।जैसे- नजरिये का महत्व, सकारात्मक नजरिया कैसे बनायें, आदि।तो दोस्तो बने रहिये हमारे साथ और नालेज बेस्ड ब्लॉग पढ़ने के लिये धन्यवाद... रोहित शर्मा
(i) सकारात्मक नजरिया
(ii) नकारात्मक नजरिया ,
आइये इन दोनो को हम एक कहानी के जरिये समझते है।एक दिन एक आदमी अपने 10 साल के बेटे को बाजार में घुमाने ले गया।दोनों बाजार में घूम ही रहें थे।कि बेटे ने एक दुकान पर सेब रखेदेखे तो उसने वो सेब लेने के लिए अपने पिता से जिंद की।तो उस आदमी ने अपने बेटे को तीन.सेब दिला दिये।और घर की ओर चलने लगें।रास्ते में उस आदमी ने अपने बेटे से एक सेब मांगा एक सेब वो लड़का पहलेसे खा रहा थापिता के मांगने पर उसने उन दोनों सेबों मे भी मूँह मार दिया।अब मैं आपसे यह पूछना चाहूँगा।कि इस समय उस आदमी का नजरिया कैसा होगा।या बो अपने बेटे के बारे में क्या सोच रहा होगा।यही कि यह अभी इतनी छोटी उम्रमें ऐसा कर रहा हैं।तो बड़ा होकर पता नही हमारे साथ क्या करेगा।यानि उस आदमी का अपने बेटे के प्रति नजरिया नकारात्मक होगा न।लेकिन अगले ही पल बेटा अपने पापा से बोलता है।कि पापा ये वाला सेब आखाओ यें मीठा हैं।अब उस इंसान का नजरिया कैसा होगा।बेटा अपने पिता को मीठा सेब खिलाना चाहता था।तो दोस्तों शायद आपको समझ आ गया होगा।और हम आगे और भी पोस्ट नजरिया के ऊपर डालने वाले हैं।जैसे- नजरिये का महत्व, सकारात्मक नजरिया कैसे बनायें, आदि।तो दोस्तो बने रहिये हमारे साथ और नालेज बेस्ड ब्लॉग पढ़ने के लिये धन्यवाद... रोहित शर्मा
